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आरती

देवी देवताओ को प्रसन्न करने के लिये आरती गाए जाने का प्रचलन है। विभिन्न देवी देवताओं की आरती व पूजा की विधियां भिन्न भिन्न हैं। मां महामाया देवी की आरती प्रतिदिन प्रातः व सायं की जाती है एवं भक्तगण भारी संख्या में इसमें भाग लेते हैं।

दर्शन

ईश्वर हर जगह है और उसका दर्शन कोई भी व्यक्ति कहीं भी कर सकता है। परंतु इसके लिये जिस साधना की आवश्यकता है वह हरेक के लिये संभव नहीं है। मंदिर में स्थापित मूर्ति एक प्रतीक मात्र है। वहां का शान्त एवं पवित्र वातावरण हमें अपने ध्यान को केन्द्रित करने के लिये आवश्यक है। तभी हम अपनी मन की आंखों से अपने आराध्य देवी देवताओं के दर्शन कर सकते हैं।

कलश

कलश तैल या घृत से जलाया गया दीप है। कलश से न केवल बाहरी अंधकार बल्कि अपने मन के अंधकार को भी दूर किया जा सकता है। यह मान्यता है कि नवरात्र में देवी के समक्ष प्रज्जवलित किए गए कलश से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

नवरात्र

नवरात्र सामान्यतः नौ दिन के होते हैं एवं वर्ष में दो बार आते हैं। किंतु ये कभी कभी ६ दिनों के भी हो सकते हैं। अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार ये मार्च तथा अक्टूबर माह में पड़ते हैं किंतु कभी कभी ये एक एक माह आगे पीछे भी पड़ जाते हैं। हर वर्ष हिंदू पंडितों के द्वारा इनकी गणना करके सही तिथि निर्धारित की जाती है।

नवरात्र में उपवास, प्रार्थना एवं आराधना के द्वारा देवी की अर्चना की जाती है। मंदिर में इस अवसर पर विराट उत्सवों का आयोजन किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए हमारे कलश पृष्ट पर जाएं।

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