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रतनपुर और उसके आसपास के मंदिरों में से सबसे महत्त्वपूर्ण मंदिर हैं: काल-भैरव मंदिर, लखनी देवी मंदिर, वृद्धेश्वर नाथ मंदिर (बूढ़ा महादेव), श्री गिरिजाबंध हनुमान मंदिर और रामटेकरी मंदिर।

काल-भैरव मंदिर जाकर काल भैरव का दर्शन हरेक देवी भक्त के लिये अनिवार्य माना गया है, क्योंकि भैरव को मां महामाया देवी का द्वारपाल माना जाताअ है। काल-भैरव के दर्शनों एवं पूजा के उपरांत ही मां महामाया के दर्शन और पूजा किया जाना यथोचित है। रतनपुर के काल-भैरव कुल 52 भैरवों में से एक हैं। नौ फीट ऊंची उनकी प्रतिमा पत्थर से निर्मित है। काल-भैरव मंदिर मां महामाया मंदिर से लगभग 3 किमी की दूरी पर दक्षिण में (बिलासपुर मार्ग पर) स्थित है।

Bhairav statue
काल-भैरव
Shri Ram Tekri Mandir
श्री राम टेकरी मंदिर

लखनी देवी मंदिर हरे भरे वृक्षों से ढंकी एक पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ी के पत्थरों को काटकर सीढ़ियां बनाई गई हैं। मंदिर पौराणिक पुष्पक विमान की शक्ल में है। इस मंदिर का निर्माण पंडित गंगाधर शास्त्री के द्वारा तेरहवीं सदी में बनवाया गया था।

एक अन्य पहाड़ी पर हरीतिमा से घिरा हुआ एक पुराना मंदिर राम टेकरी मंदिर है। इसी नाम की पहाड़ी पर स्थित इस राम-जानकी मंदिर में श्रीराम, सीताजी एवं हनुमानजी की ग्रेनाइट पत्थर से बनी सुंदर प्रतिमाएं हैं। इस मंदिर का निर्माण मराठा राजा शिवाजीराव भोंसले ने करवाया था। सीधी चढ़ाई वाले इस मंदिर तक कार द्वारा जाया जा सकता है। यह प्रसिद्ध मंदिर रतनपुर से लगभग 3 किमी दूरी पर है। इस मंदिर की अन्य मूर्त्तियों में प्रमुख भगवान विष्णु तथा काल-भैरव की मूर्त्तियां हैं। यह मंदिर ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके अलावा आप इस पहाड़ी से पूरी रतनपुर नगरी का विहंगम दृष्य भी देख सकते हैं.

 

वृद्धेश्वर नाथ मंदिर और गिरिजाबन्ध हनुमान मंदिर राम टेकरी पहाड़ी के दोनों ओर स्थित हैं। इन मंदिरों के श्रद्धालुगण भी भारी संख्या में दर्शनों के लिये आते हैं। वृद्धेश्वर नाथ या बूढ़ा महादेव रतनपुर के सबसे रहस्यमय और चमत्कारिक मंदिरों में से एक है। यह मान्यता है की यदि इसके शिवलिंग पर हज़ारों घड़े भी जल चढ़ाया जाए तो भी लिंग का जल स्तर वही रहता है। यही नहीं, अत्यंत सूखे के दिनों में भी, जब नदी तालों में पानी दिखाई नहीं पड़ता, यहां का जल स्तर वहीं का वहीं रहता है। कांसे की मिश्र धातुसे निर्मित यह शिवलिंग सदैव एक आभा लिये हुए रहता है। रतनपुर आकर इनका दर्शन अवश्य करना चाहिये।

रामटेकरी के पूर्व में स्थित श्री गिरिजाबंध हनुमान मंदिर का निर्माण कल्चुरि राजा पृथ्वी देव ने लगभग संवत्‌ 1170 ई में करवाया था। पुरातात्त्विक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण इस मंदिर का स्तूप लाल पत्थर से निर्मित है। अंदर हनुमान जी की विराट प्रतिमा है जिसमें उन्होंने श्री रामजी को अपने कंधों पर बैठाया हुआ है। यह मान्यता है कि इस मंदिर में की गई मनोकामना हनुमानजी शीघ्र ही पूरी करते हैं।

इन सब के अलावा रतनपुर और उसके आसपास अनेक छोटे बड़े मंदिर हैं जिनमें से प्रमुख भुवनेश्वर मंदिर (या लहेश्वर मंदिर), बैराग बन, जगन्नाथ मंदिर, खंडोबा बाबा और खिचड़ी केदारनाथ मंदिर हैं। एक अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल एवं पिकनिक स्पॉट खूंटाघाट बांध यहां से 10 किमी दूर है।

Girijabandh Hanumaan Mandir
श्री गिरिजाबंध हनुमान मंदिर
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